श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र की अनमोल कथा सुन भक्त हुए भाव विभोर

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कानपुर :-: कानपुर के खाडेपुर में स्थित बाबा सोमनाथ के मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा वाचक पं.  दीदी अनमोल तिवारी के मुखारविंद से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र का विस्तृत वर्णन सुनाया। उन्होंने बताया कि यदि सुदामा दरिद्र होते तो अनके लिए धन की कोई कमी नहीं थी। सुदामा के पास विद्वता थी और धनार्जन तो सुदामा उससे भी कर सकते थे। मगर सुदामा पेट के लिए नहीं बल्कि आत्मा के लिए कर्म कर रहे थे। वे आत्म कल्याण के लिए उद्धत थे।

 

 

 

कथावाचक दीदी अनमोल तिवारी ने कहा- कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। कथावाचक ने कृष्ण सुदामा के गुरुकुल समय से लेकर पूरी कथा संपूर्ण एवं सरल रूप से सुनाई। कथावाचक दीदी ने बताया कि जब श्री कृष्ण भगवान ने द्वारपाल के मुख से सुना द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंच गए। यह सब देख वहां लोग यह समझ ही नहीं पाए कि आखिर सुदामा में ऐसा क्या है जो भगवान दौड़े दौड़े चले आए। बचपन के मित्र को गले लगाकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें राजमहल के अंदर ले गए और अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके पांव पखारे।

 

कथावाचक दीदी अनमोल तिवारी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया और दुनिया के सामने यह संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। कथावाचक ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण सरल शब्दों में वर्णन किया। सुदामा चरित्र का वर्णन सुनकर वहां मौजूद सभी भक्तों भाव विभोर हो गए। सुदामा चरित्र की कथा सुन कई श्रोताओं के तो अश्रु धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

 

 

 

आपको बता दें कि बाबा सोमनाथ मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री बांके बिहारी निकुंज सेवा समिति के तत्वाधान एवं महंत श्याम तिवारी की देखरेख में किया जा रहा है।

 

रिपोर्ट वैभव तिवारी

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