कानपुर में हिस्ट्रीशीटरों का वर्चस्व:सत्ता के दम पर खत्म हुई भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष की हिस्ट्रीशीट, हत्या और NSA जैसे हैं गंभीर मुकदमे

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कानपुर ।

डीआईजी अनंत देव ने मानकों को ताक पर रख कर खत्म की हिस्ट्रीशीट।

भारतीय जनता पार्टी कानपुर में अपराधी पदाधिकारियों की लंबी लिस्ट है। नारायण सिंह भदौरिया कांड के बाद हमारे संवाददाता की पड़ताल में एक और बड़ा राजफाश हुआ है। बर्रा के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर संदीप ठाकुर ने अपने रसूख और पैसे के दम पर पहले भरतीय जनता पार्टी में युवा मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष का पद हासिल किया। इसके बाद सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल करके अपनी हिस्ट्रीशीट खत्म करा ली। आपको जानकर हैरत होगी कि तत्कालीन डीआईजी ने मानकों को ताक पर रखकर इतने शातिर अपराधी की हिस्ट्रीशीट खत्म कर दी गई। जबकि किसी भी सक्रिय अपराधी की हिस्ट्रीशीट खत्म ही नहीं कि जा सकती है। जब उसके सभी मुकदमें ट्रायल पर हैं। सिर्फ बर्रा थाने के सात मुकदमें अभी चल रहे हैं।

 

हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह के बाद संदीप ठाकुर का कच्चा चिट्‌ठा अब अफसरों के सामने आने के बाद से एक बार फिर भाजपाइयों में खलबली मच गई है। वहीं, कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने कहा कि संदीप ठाकुर के हिस्ट्रीशीट बंद करने की जानकारी मिली है। इस मामले में जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद हिस्ट्रीशीट खोलने के साथ ही मानकों को ताक पर रखकर हिस्ट्रीशीट बंद करने के दोषी अफसरों की एक रिपोर्ट उच्च अफसरों को कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।

 

*छात्रसंघ जुलूस में बीच सड़क की थी विरोधी की हत्या*

संदीप ठाकुर 2002 में कानपुर के डीबीएस कॉलेज गोविंद नगर से अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहा था। जुलूस के दौरान बर्रा दो सब्जी मंडी में विरोधी मनोज सिंह का जुलूस सामने आया तो जबरदस्त मारपीट शुरू हो गई थी। इस दौरान संदीप ने विरोधी मनोज के समर्थक टोनी यादव को गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में संदीप उसके पिता जेबी सिंह और भाई संजीव समेत अन्य के खिलाफ बर्रा थाने में हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में गवाही और ट्रायल अंतिम पड़ाव पर है। जल्द ही संदीप के साथ ही इसमें आरोपी उसके पिता जेबी सिंह और भाई सिंह को सजा होनी तय माना जा रहा है।

 

*वस्त्र मंत्रालय का फर्जी मंत्री बना और ड्रग्स माफिया दी थी लालबत्ती*

शातिर संदीप ठाकुर के जालसाजी का इतिहास जानकार आप भी दंग रह जाएंगे। शातिर संदीप ठाकुर 2008 में वस्त्र मंत्रालय फर्जी मंत्री बन गया और लाल बत्ती से घूमने लगा। इसके बाद इसने ड्रग्स माफिया बृजेंद्र सोनकर और अपने सगे बहनोई से भी 35-35 लाख रुपए लेकर मंत्रालय का फर्जी लेटर जारी करके लाल बत्ती बांट दी थी। अपराधी लाल बत्ती से घूमने लगे तो शहर में खलबली मच गई। मंत्रालय में इसकी शिकायत हुई थी। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया तो सभी की गाड़ियों से लालबत्ती उत्तरी थी।

 

 

*कानपुर के पूर्व डीआईजी अनंत देव ने मानकों को ताक पर रख कर खत्म की हिस्ट्रीशीट*

भारतीय जनता युवा मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संदीप ठाकुर की कुंडली खंगाली गई तो सामने आया कि सिर्फ बर्रा थाने में ही हत्या, हत्या के प्रयास, एनएसए और बलवा समेत सात गंभीर मुकदमें दर्ज हैं। कानपुर और गैरजनपद मिलाकर एक दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं में मुकदमें बताए जा रहे हैं। इसके बाद भी नवंबर 2019 में तत्कालीन डीआईजी अनंत देव ने हिस्ट्रीशीट खत्म कर दी। हिस्ट्रीशीट खत्म होने के बाद संदीप की निगरानी भी बंद कर दी गई है।

 

*नहीं खत्म हो सकती हिस्ट्रीशीट*

कानपुर कमिश्नर असीम अरुण ने बताया कि एक बार हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद आजीवन उसे खत्म नहीं किया जा सकता है। संदीप ठाकुर तो सक्रिय अपराधी है और उसके मुकदमें भी अभी खत्म नहीं हुए हैं। इसके बाद भी उसकी हिस्ट्रीशीट क्यों खत्म कर दी गई जांच का विषय है। मई 2008 में बर्रा पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोली थी। नवंबर 2019 में उसकी हिस्ट्रीशीट खत्म कर दी गई।

 

*युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बोले मेरा छात्र राजनीति का है साथी*

भाजयुमो के क्षेत्रीय अध्यक्ष विकास दुबे से इस संबंध में बात करने पर बताया कि संदीप ठाकुर मेरे छात्र राजनीति का साथी है। इसके चलते उसे क्षेत्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उसके अपराधिक इतिहास की मुझे जानकारी नहीं है।

 

*क्षेत्रीय अध्यक्ष बोले-मुझे मालूम नहीं..*

भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई भी जानकारी नहीं है। भाजयुमो का क्षेत्रीय अध्यक्ष से इस संबंध में बात कीजिए। यह कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

 

वर्जन-

डीआईजी अनंत देव

 

मेरे मुताबिक, मेरे कार्यकाल के दौरान कानपुर के निष्क्रिय अपराधियों, बुजुर्ग हो गए हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट बंद करने का अभियान चलाया गया था। संदीप ठाकुर की किस आधार में बंद हुआ मुझे याद नहीं है।

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