निवेदिता की सोच के कारण झोपड़ी में रहने वाले गरीब बच्चों ने पकड़ी किताब और कलम..

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*निवेदिता की नई सोच के चलते झोपड़पट्टी के बच्चों ने पकड़ी किताब और कलम*

 

 

कानपुर : कहते हैं ना जब दिल में कुछ करने का जुनून होता है। तो बात ही कुछ अलग होती है। कहते हैं कि देश का भविष्य युवा हैं। लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसे हुनरमंद होते हैं। जो अपने साथ दूसरों को भी लेकर चलते हैं। चाहे वह धनवान हो या निर्धन आज हम आपको बता रहे हैं। कानपुर की एक बिटिया निवेदिता तिवारी के बारे में जो अपने ही खर्च पर एक ऐसा काम कर रही है। जिसे देखकर दिल खुश हो जाता है।

आपको बता दें कि निवेदिता झोपड़पट्टी में रहने वाले छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षित करने का प्रण किए हैं। और लगभग पिछले 15 दिनों से कानपुर के मोरम मंडी जो कि नौबस्ता चौराहे के पास है। वहां पीछे रहने वाले झोपड़पट्टी के छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं और अपनी पॉकेट मनी खर्च कर बच्चों के लिए वह सब सामान लाती हैं। जो पढ़ाई में उनको जरूरी है। निवेदिता के साथ इस काम में सहयोग उनकी एक मित्र महक सिंह भी हैं, जो साथ में सहयोग कर झोपड़पट्टी में रहने वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही है।

फेसबुक पर इंस्टा पर समय बर्बाद ना कर बच्चों के लिए निकालती हैं समय

 

न्यूज़ क्रांति की टीम ने जब निवेदिता तिवारी से पूछा कि आखिर उनको यह विचार कैसे आया। तो उनका कुछ जवाब नहीं था। निवेदिता ने बातचीत के दौरान बताया कि एक दिन वह झोपड़पट्टी में रहने वाले बच्चों को बिस्किट वितरण करने आई थी, कि तभी उनके मन में ख्याल आया कि बिस्किट खा कर वह फिर से ज्यों की त्यों हो जाएंगे। लेकिन अगर उनको बिस्किट के बदले कलम पकड़ाई जाएगी तो हो सकता है। इनमें से कोई आगे चलकर मिसाइल मैन या देश का गौरव बढ़ाने वाला प्रधानमंत्री भी बन सकता है। यह मासूम देश का भविष्य है। अगर इनको सही सीख दी गई तो यह हमारे देश का नाम रोशन करेंगे। निवेदिता ने बताया कि वह अपनी मित्र महक सिंह के साथ मिलकर लगभग पिछले 15 दिन से झोपड़पट्टी के बच्चों को पढ़ा रही हैं और इन्हें पढ़ाने के लिए पहले तो उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता से भी काफी जद्दोजहद कर परमिशन ली और सभी बच्चों को पढ़ाने का प्रण लिया और आज काफी बच्चे ऐसे हैं जो पढ़ना भी सीख चुके हैं।

निवेदिता का कहना है कि समाज के सभी लोगों को आगे आकर ऐसे लोगों के लिए शिक्षा देनी चाहिए। जिससे यह लोग भी पढ़ कर देश का नाम रोशन कर सकें। आप कई सोशल मीडिया ऐप का इस्तेमाल कर आधे से 1 घंटे समय व्यतीत कर देते हैं। उस समय का पता भी नहीं चलता लेकिन अगर आप वह समय ऐसे झोपड़पट्टी के बच्चों को देंगे तो हो सकता है। इनमें से आगे चलकर कोई देश का गौरव बने।

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Anuj jain

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